दो रसूखदार नशेड़ी चढ़े पुलिस के हत्थे,गोगरी में शराब का धंधा नहीं पड़ा है मंदा,अन्य नशीली पदार्थों की बिक्री चरम पर।

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खगड़िया – शराबबंदी के बाद भी बिहार के विभिन्न जिलों में शराब के कारोबार पर प्रतिबंध लगा पाना टेढ़ी खीर तो साबित हो ही रही है, खगड़िया जिले के गोगरी अनुमंडल क्षेत्र में शराब की बिक्री और सेवन पर रोक नहीं लग पाना चिंतन का विषय है। लेडी सिंघम के रुप में पुलिस कप्तान की भूमिका निभा रही मीनू कुमारी के सख्त दिशा-निर्देश के बाद भी गोगरी थाना क्षेत्र में शराब की बिक्री और सेवन पर रोक क्यों नहीं लग पा रही है, यह तो शासक-प्रशासक ही जानें। लेकिन बीती रात लेडी सिंघम के दिशा-निर्देश को अमलीजामा पहनाते हुए पुलिस निरीक्षक सह गोगरी थानाध्यक्ष विनोद कुमार सिंह के द्वारा दो रसूखदार नशेड़ियों को गिरफ्तार किया जाना चर्चा का विषय बना हुआ है। उसमें भी तब जब पुलिस की गिरफ्त में आये दो रसूखदार नशेड़ियों में एक नशेड़ी अनुमंडल पदाधिकारी के नाक के बाल माना जाता है जबकि एक कोख की सौदा करने वाली बहुचर्चित एएनएम का पुत्र है।
दरअसल, लेडी सिंघम के रुप में पुलिस कप्तान की भूमिका निभा रही मीनू कुमारी के सख्त दिशा-निर्देश पर शराब कारोबारी व नशेड़ी के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के बीच पुलिस निरीक्षक सह गोगरी थानाध्यक्ष विनोद कुमार सिंह को यह जानकारी मिली कि कोख की सौदा करने की आरोपी सेवानिवृत्त एएनएम सीता देवी की क्लीनिक के समीप कुछ नशेड़ी नशा का सेवन कर रहे हैं। जानकारी मिलते ही थानाध्यक्ष ने जब चिन्हित स्थल के पास छापेमारी की तो बहुचर्चित नर्स सीता देवी का पुत्र अर्थात स्वर्गीय हरिनारायण मंडल का लगभग 42 वर्षीय पुत्र रोशन कुमार तथा किशन मुनि का लगभग 50वर्षीय अनिल कुमार नशे की हालत में पुलिस के हत्थे चढ़ गया। वैसे इस तरह का मामला कम से कम गोगरी थाना क्षेत्र के लिए नया नहीं है। कहा जाता है कि बिहार में शराबबंदी कानून लागू होने के बाद कुछ समय तक इसका असर गोगरी थाना क्षेत्र में भी देखने को मिल रहा था। लेकिन वक्त का पहिया जैसे-जैसे घूमता गया, वैसे-वैसे उत्पाद विभाग व पुलिस पदाधिकारियों की सक्रियता दम तोड़ती गई और गांजा-भांग व कफ सिरप से लोग नशे की भूख मिटाने लगे। हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चोरी-छिपे होम डिलिवरी के माध्यम से शराब की बिक्री चरम पर पहुंच गयी। हद तो यह है कि प्रशासनिक लापरवाही के कारण अब नशेड़ी बिना किसी डर के सार्वजनिक जगहों पर धड़ल्ले से गांजा व कफ सिरप का सेवन करते तो देखे जा ही रहे हैं, शराब का सेवन भी खुलेआम हो रहा है। स्थानीय लोगों की बातों पर अगर ऐतबार करें तो गोगरी अनुमंडल क्षेत्र के सीमावर्ती इलाके अर्थात मुंगेर,बेगूसराय, सहरसा और
भागलपुर की सीमा होने के चलते शराब व गांजे की खेप गोगरी अनुमंडल क्षेत्र के विभिन्न गांवों तक आसानी से पंहुच रही है। जानकारों का कहना है कि गोगरी अनुमंडल क्षेत्र के कई बाजार व मोहल्लों की मुख्य सड़कों पर गांजा का सेवन करते नशेड़ी देखे जा ही सकते हैं,शराब का सेवन करने से भी नशेड़ी चूक नहीं रहे हैं। पुलिस ऐसे तत्वों के विरुद्ध किसी भी तरह की कार्रवाई करने में अपने-आपको अक्षम महसूस कर रही है। जबकि राज्य सरकार के साथ-साथ पुलिस कप्तान मीनू कुमारी ने स्पष्ट कर दिया था कि जिस थाना क्षेत्र में शराब और गांजा की बिक्री होगी अथवा नशेड़ी या कारोबारी पकड़े जाएंगे, वहां के पुलिस पदाधिकारी को जिम्मेदार मानकर उनके विरुद्ध गंभीर कार्रवाई होगी। बावजूद इसके पुलिस सब कुछ जानते के बाद भी अनजान बनी बैठी रहती है। यही कारण है कि नशा करने तथा नशे के सामानों की खरीद-फरोख्त करने वालों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं। इधर पुलिस निरीक्षक सह गोगरी थानाध्यक्ष विनोद कुमार सिंह का कहना है कि गांजे या शराब की बिक्री की सूचना मिलते ही न केवल चिन्हित स्थलों पर छापेमारी की जाती है बल्कि दोषियों को गिरफ़्तारी कर उनके विरुद्ध क़ानूनी कार्रवाई भी की जाती रही है। गिरफ्त में आए दोनों रसूखदार नशेड़ी भी पुलिस की सक्रियता के कारण जेल की सलाखों के पीछे भेजे गए हैं। रोशन कुमार तथा अनिल कुमार गोगरी थाना क्षेत्र के छोटीचक निवासी हैं। बकौल थानाध्यक्ष, किसी भी क्षेत्र में शराब या गांजे का धंधा होने की जानकारी लोगों के द्वारा बेहिचक संपर्क कर दी जा सकती है, कार्रवाई जरूर होगी और नाम भी गुप्त रखा जाएगा। बहरहाल, देखना दिलचस्प होगा कि जिलाधिकारी जय सिंह तथा पुलिस कप्तान मीनू कुमारी के द्वारा नशामुक्त समाज की स्थापना की कोशिशें कब रंग लाती है!
राजेश सिन्हा की रिपोर्ट