आर्मी जवान की निर्मम हत्या, शव को पोस्टमार्टम कक्ष तक पहुंचाने के लिए स्ट्रेचर तक नहीं हुआ नसीब, ग्रामीणों में आक्रोश, स्वास्थ्य व्यवस्था की खुली पोल।

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कैमूर -आर्मी की ड्यूटी से छुट्टी लेकर एक माह पूर्व घर आए आर्मी जवान की निर्ममतापूर्वक हत्या कर उसके शव को गांव के बधार में फेंक दिया गया । अहले सुबह शौच करने के लिए बाहर निकले ग्रामीणों की नजर जब खेत में पड़ी लाश पर पड़ी तो शोर मचाया गया। ग्रामीणों द्वारा भगवानपुर थाना को सूचना दिए जाने के एक घंटे बाद पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भभुआ सदर अस्पताल भेज दिया । मामला कैमूर जिले के भगवानपुर थाना क्षेत्र के ओरगांव की है। आर्मी के जवान के शव पर कई जगह चोट के निशान तो पाए ही गए,उसकी आंख किसी नुकीली हथियार से बाहर निकाल दिए गए थे। मृतक सिलीगुड़ी में पोस्टेड था। इस घटना के बाद सदर अस्पताल में भी मृतक जवान को पोस्टमार्टम हाउस तक ले जाने के लिए स्ट्रेचर तक नसीब नहीं हुआ। परिजन आधे से एक घंटे तक स्ट्रेचर के लिए अस्पताल में चक्कर लगाते रहे। लेकिन स्ट्रेचर नहीं मिलने पर शव को  उठाकर पोस्टमार्टम हाउस तक परिजन ले गए। मृतक जवान के पिता का कहना है कि डेढ़ माह पूर्व उनका पुत्र सिल्लीगुड़ी से छुट्टी लेकर अपने घर आया था। उनकी छुट्टी खत्म हो गई थी। लेकिन पत्नी की तबीयत खराब होने के बाद कुछ दिनों और गांव पर ही रुक गए। उन्होंने कहा कि वैसे तो झगड़ा किसी से नही था। लेकिन जब भी गांव आते थे तो अपना पैसा दूसरे लोगों को आवश्यकता पड़ने पर दे दिया करते थे । इस तरह से उनका लाखों रुपये जरूरतमंदों पर बकाया था। हो सकता है ,उसी पैसे के लेनदेन में उनकी हत्या कर दी गयी हो। इधर ग्रामीणों ने बताया कि वह लोग स्ट्रेचर के लिए अस्पताल के चारों तरफ चक्कर लगाते रहे। लेकिन स्ट्रेचर उन लोगों को नहीं मिला ।उन लोगों ने उनके शव को टांग कर पोस्टमार्टम हाउस पहुंचाया।दूसरी तरफ भभुआ के सिविल सर्जन से जब पूछा गया कि जवान देश की रक्षा करते हैं। उनके शव को ले जाने के लिए स्ट्रेचर भभुआ सदर अस्पताल में नही मिला तो सिविल सर्जन ने मामले को टालते हुए भभुआ डीएस के सिर दोष मढ़ दिया। कहा कि यह मामला हमारा नही डीएस का है ,उन्ही से बात करें। हालांकि भभुआ सिविल सर्जन के लिए यह कोई नई बात नही है। बीते दिनों भी छात्रा को भभुआ सदर अस्पताल में स्ट्रेचर नही मिला था। इस संदर्भित खबर चलने के बाद भी स्वास्थ्य व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ। बात अलग है कि सूबे के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने की बात कह रहे हैं।
रिपोर्ट:मुकुल जायसवाल