अपहृत वनपाल सकुशल बरामद, अपहरणकर्ताओं के साथ पुलिस की मुठभेड़ के बाद संभव हो सकी बरामदगी, आठ लाख मांगी गई थी फिरौती।

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कैमूर -जिले के अधौरा थाना अंतर्गत करर गांव के पास बने वन विभाग के चेक पोस्ट पर तैनात वनपाल सुरेश रजक को सकुशल बरामद कर लिया गया है। बीते 20नवम्बर की रात लगभग सात बजे अपराधियों ने सुरेश रजक का अपहरण कर लिया था और उनकी रिहाई के लिए उनके बेटे कौशल कुमार के पास फोन कर आठ लाख की फिरौती की मांगी थी। कैमूर के प्रभारी SP के नेतृत्व में 8 सदस्यीय टीम का गठन कर 3 दिन बाद अपहृत वनपाल सुरेश रजक को सकुशल बरामद किया गया है। प्रभारी एसपी ने प्रेस वार्ता कर बताया कि अपराधियों ने 20 नवंबर को वनपाल का अपहरण कर लिया था। उसके बाद से उनकी टीम मोबाइल सर्विलांस के आधार पर अपराधियों के लोकेशन को ले जाल बिछा रही थी,तभी गुप्त सूचना मिली कि बेलांव थाना क्षेत्र के सोनांव गांव के पहाड़ की तलहटी के पास हथियार के साथ कुछ संदिग्ध लोग देखे गए हैं । पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 23 नवंबर की रात सोनांव गांव के तलहटी के चारों तरफ पुलिसिया जाल बिछाया और पूरी रात सघन छापेमारी अभियान करते हुए 24 नवंबर की अहले सुबह वनपाल सुरेश रजक वनपाल को बरामद कर लिया। हालांकि कुछ हथियारबंद अपराधियों के साथ देखे जाने के बाद दोनों तरफ से गोलीबारी भी हुई थी। इस दौरान अपराधियों ने पुलिस के ऊपर 10 राउंड गोलियां चलाई जबकि पुलिस ने भी अपराधियों को खदेड़ते हुए जवाबी कार्रवाई में 15 राउंड गोलियां चलायी। अपहरणकर्ता अपने आप को घिरता देख अपहृत सुरेश रजक को छोड़कर भाग गए । घटनास्थल से एक 12 बोर का देसी कट्टा, तीन खोखा, और दो जिंदा कारतूस बरामद कर लिया गया । लेकिन यह क्लियर नहीं हो पाया कि अपहरणकर्ता नक्सली था या अपराधी। यह भी नहीं स्पष्ट हो पाया है उनका मुख्य मकसद पैसे लेना था। वनपाल को सही सलामत बरामद करने के बीच बदमाश फायरिंग करते हुए भागने में सफल रहें। वहीं अपहृत वनपाल सुरेश रजक ने बताया जब मैं ड्यूटी पर तैनात था ,उसी समय रात सात बजे हथियारबंद दो लोग आएं और मेरा हाथ बांधकर अपने साथ लेते गए। 3 दिनों तक अलग-अलग जगह पर जंगलों के रास्ते मुझे चलाते रहे। वह लोग मेरे बदले पैसे की मांग कर रहे थे। लेकिन उनकी बातों से हम नहीं समझ पाए कि वो नक्सली थे या कोई और।

रिपोर्ट-मुकुल जायसवाल