बक्सर के बाबा रामेश्वर नाथ मंदिर का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्त्व।

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बक्सर से रवि मिश्रा

13 लाख वर्ष पूर्व से भी पहले हुयी थी मंदिर की स्थापना,यहाँ दर्शन से होती है सभी मनोकामनाएं पूर्ण।

बक्सर – बाबा विश्वामित्र की नगरी और मिनी कशी के नाम से प्रसिद्ध बक्सर जिला का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्त्व दोनों है। बक्सर में श्री रमेश्वरनाथ मंदिर भी धार्मिक धरोहरो में एक है। यंहा बाबा रामेश्वर के दर्शन और पूजन के लिए देश ही नहीं बल्कि विदेशो से भी लोग आते है। अति प्राचीनतम इस मंदिर की ब्याख्या धार्मिक ग्रंथो में भी पढ़ने और सुनने को मिलता है। गंगा किनारे अवस्थित इस मंदिर की महिमा भी अपरमपार है। भगवान श्री राम ने यंहा रामरेखा घाट और इस मंदिर की स्थापना तब की जब वो यंहा दूसरी बार आये थे। तो आइये आज हम आपको लिए चलते है बक्सर के रामरेखा घाट और गंगा तट पर स्थित उस अति प्राचीन मंदिर में जिसे रमेश्वरनाथ मंदिर के नाम से जाना जाता है।

बक्सर का रामरेखा घाट और यहाँ गंगा के तट पर स्थित श्री रामेश्वर नाथ मन्दिर का इतिहास कॉफी पुराना है। जानकारों के मुताविक लगभग 13 लाख वर्ष पूर्व या उससे भी पहले इस मन्दिर कि स्थपना स्वयं भगवान् श्री राम ने कि थी। पहली बार जब भगवान राम बक्सर आये तो उन्होने तड़िका बध कर आहिल्या का उद्धार किया। श्रीराम जब दूसरी बार आये तो रमेश्वरनाथ मन्दिर की स्थापना की। यंहा के महिमा का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यंहा भक्तो कि कतार कभी टूटती नहीं। ऐसी मान्यता है की यंहा सच्चे मन से पवित्र गँगा मे स्नान करके जो रमेश्वरनाथ यानि कि शंकर भगवान का जो दर्शन करता है वो कभी इस दरबार से खाली हाथ नहीं लौटता। और उस पर लगा ब्रह्म हत्या का पाप भी मीट जाता है। कहा जाता है की जब ऋषि मुनियो के उपर राक्षसो का प्रकोप बढ़ गया तब भगवान श्री राम ने राक्षसो के गमन पर रोक लागाने के लिये एक रेखा खींची ताकि चारो दिशाओ सहित आकाश और पाताल के रास्ते भी यंहा राक्षसो का प्रवेश नहीं हो सके। उसी रेखा के कारण बक्सर के इस खास जगह का नाम रामरेखा घाट पड़ा। रामरेखाघाट पर स्थित रमेश्वरनाथ मन्दिर भक्तो के लिये एक बङा आस्था का केन्द्र है।

रामेश्वरनाथ मन्दिर मे हर वक़्त भक्तो का तांता लगा रहता है। भक्त यहाँ आकर न केवल पूजा पाठ करते है बल्कि हवन और जाप कर अपने कस्टो से भी मुक्ति पाते है। कहा जाता है की श्री राम ने रामेश्वरनाथ कि स्थपना कर भोलेनाथ को प्रसन्न किया और उनसे बरदान लिया कि जो भी भक्त उनकी आराधना और पूजा करेगा उसकी सारी मनोकामना पूरी होगी। लाखो करोडो भक्त यंहा से प्रसन्न होकर गये और मन्दिर का प्रचार प्रसार किया। यह भी कहा जाता है की यंहा के भोलेनाथ कि महीमा कॉफ़ी निराली है और वो कभी अपने भकतो को कभी भी निराश नहीं करते।

यंहा आनेवाले भक्त भी यँहा के भग्वान की महीमा से अवगत है और मानते है कि जो भी यंहा सच्चे मन से आता है उसकी तामाम मुरादे पुरि होति है और उसकी सभी पाप भी नस्ट हो जाते है।

बक्सर मे कई ऐसे प्राचीन मन्दिर और धार्मिक स्थान है जिसका व्याख्यान करना असान नहि है। पर यंहा मौजूद सभी मंदिरो का काफी पुराना इतिहास है लिहाजा अनायाश हि भक्त यंहां खिचे चले आते है।