पटना, (हि.स.)| बिहार सरकार ने मंगलवार को मंत्रियों और मंत्री की सुविधाप्राप्त अन्य महानुभावों के साथ कार्यरत बाहरी व्यक्तियों को आप्त सचिव, निजी सहायक, निम्न वर्गीय लिपिक और कार्यालय परिचारी को भी सातवें वेतनमान का लाभ देने का निर्णय लिया है। कैबिनेट मंत्री को एक राजपत्रित पदाधिकारी को आप्त सचिव मिलने के साथ एक बाहरी व्यक्ति को भी राजपत्रित पदाधिकारी के रूप में आप्त सचिव रखने की सुविधा मिलती है। इसके साथ ​दो निजी सहायक, एक निम्न वर्गीय लिपिक और तीन कार्यालय परिचारी पद पर बाहरी व्यक्तियों को रखने की सुविधा मिलती है।
संसदीय कार्य विभाग के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार राज्य मंत्री और उप मंत्री को आप्त सचिव के रूप में बाहरी व्यक्ति को रखने की सुविधा नहीं है। उन्हें दो कार्यालय परिचारी रखने की सुविधा है। आप्त सचिव को भी एक—एक कार्यालय परिचारी रखने की सुविधा मिलती है। विधानसभा और विधान परिषद में सत्तारुढ़ दल के मुख्य सचेतक को कैबिनेट मंत्री, सचेतक को उप मंत्री, मुख्य विपक्षी दल के मुख्य सचेतक को राज्य मंत्री, विधानसभा के अध्यक्ष, परिषद सभापति और विपक्ष के नेता को कैबिनेट मंत्री और विधानसभा के उपाध्यक्ष एवं परिषद सभापति को राज्यमंत्री के बराबर सुविधायें मिलती है। मुख्यमंत्री के विशेष आदेश पर विभिन्न बोर्ड, निगमों और आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों को भी मंत्री, राज्यमंत्री एवं उप मंत्री की सुविधायें मिलती हैं । ​प्रदेश में फिलहाल मुख्यमंत्री सहित कैबिनेट स्तर के 29 मंत्री हैं।
वित्त विभाग द्वारा जारी आदेश के तहत मंत्रियों द्वारा विभिन्न पदों पर नियुक्त 200 से अधिक व्यक्तियों को सातवें वेतन का लाभ मिलेगा। बाहरी व्यक्तियों को वार्षिक वेतनवृद्धि क लाभ ​नहीं मिलता है। सातवें वेतन का लाभ अन्य राज्यकर्मियों की तरह अप्रैल ,2017 से ही मिलेगा।
AdvertisementRelated image