नई दिल्ली (हि.स.)। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की दलील को स्वीकार करते हुए सिनेमाघरों में सिनेमा शुरू होने से पहले राष्ट्रगान चलाने और उसके सम्मान में सभी दर्शकों को अनिवार्य रूप से खड़े होने के अपने आदेश को बदल दिया है। उच्चतम न्यायालय के अनुसार, अब सिनेमा घरों में सिनेमा शुरू होने से पहले राष्ट्रगान चलाने और उसके सम्मान में सभी दर्शकों को खड़ा होना अनिवार्य नहीं है।

मंगलवार को चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष केंद्र सरकार की ओर से अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने हलफनामा दायर करते हुए सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेश को वापस लेने की मांग की। बता दें कि पिछले 23 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा था कि वह सिनेमाघरों और दूसरे सार्वजानिक समारोहों में राष्ट्रगान चलाने को लेकर रूल तैयार करे। क्योंकि कोर्ट को सिनेमाघरों में राष्ट्रगान अनिवार्य करने के लिए बाध्य नहीं करना चाहिए। यह काम केंद्र सरकार को करना चाहिए।
मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा था कि कोर्ट नागरिकों को इस बात के लिए बाध्य नहीं कर सकती है कि वे अपनी बाहों पर देशभक्ति का पट्टा लगाकर चलें। कोर्ट अपने आदेश से लोगों में देशभक्ति की भावना नहीं भर सकती। बता दें कि 30 नवम्बर 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि सिनेमा घरों में सिनेमा शुरु होने से पहले राष्ट्रगान चलाना होगा और सभी दर्शकों को राष्ट्रगान के सम्मान में अनिवार्य रूप से खड़ा होना होगा।
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