नई दिल्ली, (हि.स.)। दिल्ली में हुई प्रथम प्रवासी भारतीय सांसद सम्मेलन में श्रीलंका से आए भारतीय मूल के सांसद अरूणाचेलम् अराविंध कुमार भावुक हो गए। उन्होंने भारत सरकार से गुहार लगाते हुए अपनी व्यथा सुनाई और रूंधे गले से पूछा कि हम कहां जाएं? 200 साल बाद भी हमें श्रीलंकाई सरकार अपना नहीं मानती और भारत सरकार हमारे भारतीय मूल का होने के बहुत से सबूत मांगती है।

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श्रीलंका से आए तमिल मूल के सांसद अरूणाचेलम् ने बताया कि 200 साल बाद भी श्रीलंका में उनके समुदाय के लोगों के जन्म प्रमाण-पत्र पर ‘भारतीय तमिल’ लिखकर दिया जाता है। श्रीलंका में सरकार उन्हें श्रीलंकाई तमिल नहीं मानती। उन पर आज भी भारतीय मूल का कहा जाता है। हमें इससे कोई समस्या नहीं है। हम अपनी भारतीय जड़ों पर गर्व महसूस करते हैं, लेकिन जब हम भारत सरकार के पास ओवरसीज इंडियन कार्ड लेने जाते हैं, तो हमसे ढेर सारे कागजात मांगे जाते हैं। हमें भारतीय सरकार के सामने खुद को भारतीय मूल का होने का तथ्य साबित करने को कहा जाता है। ऐसे में हम कहां जाएं। श्रीलंका सरकार हमें अपना नहीं मानती, और भारत सरकार हमसे सबूत पर सबूत मांगती है।

प्रवासी भारतीय सांसद सम्मेलन के उद्घाटन के बाद श्रीलंका से आए चार सांसदों ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मुलाकात की और अपनी व्यथा फिर कही। इस पर सुषमा स्वराज ने तुरंत श्रीलंका में मौजूद भारतीय उच्चायुक्त को फोन करवाया और उन्हें तमिल समुदाय की इस समस्या पर रिपोर्ट देने को कहा।

अरूणाचेलम् श्रीलंका की संसद में 2015 से हैं। वे श्रीलंका के अप-कंट्री पीपुल्स फ्रंट के वरिष्ठ उपाध्यक्ष हैं। उनके पूर्वज करीब 200 साल पहले श्रीलंका चाय के बागानों में काम करने तमिलनाडु से गए थे, तभी से वे लोग श्रीलंका में रह रहे हैं। अरूणाचेलम् के साथ सांसद मलागमन् थिलाकराजह, सांसद एम. वेलू कुमार, सांसद वदीवेल सुरेश भी प्रवासी भारतीय सांसद सम्मेलन में आए थे।

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