मुंबई, हि.स.)। केंद्र सरकार के प्रयासों के बाद भी बैंकों को बैड लोन एनपीए के जाल से उबारने में सफलता नहीं मिल रही है। सितंबर 2017 को खत्म हुई तिमाही में सरकारी बैंकों का एनपीए 7.34 लाख करोड़ रुपए के पार पहुंच गया है। कॉरपोरेट डिफॉल्टर्स की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है। सरकारी बैंकों के मुकाबले निजी बैंकों का एनपीए काफी कम है। एक रिपोर्ट के मुताबिक निजी बैंकों का एनपीए 30 सितंबर तक 1.03 लाख करोड़ रुपए था। बैड लोन के मामले में एजुकेशन लोन व हाउसिंग लोन भी बड़ी समस्या बन रही है। इस सेगमेंट के तहत दिए गए लोन चुकाए न जाने से भी बैंकों का डूबा हुआ कर्ज बढ़ रहा है। कर्ज लौटाने में चूक बढ़कर मार्च 2017 में कुल बकाए का 7.67 प्रतिशत हो गया है। दो साल पहले यह आंकड़ा 5.7 प्रतिशत था। भारतीय बैंक संघ (आईबीए) के आंकड़े के अनुसार वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान कुल शिक्षा कर्ज 67,678.5 करोड़ रुपए था, जिसमें 5,191.72 करोड़ रुपए का एनपीए (गैर-निष्पादित परिसंपत्ति) दर्ज हुई है। वित्त मंत्रालय ने आरबीआई के डेटा का हवाला देते हुए यह आंकड़े पेश किए हैं। आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, 30 सितंबर को खत्म हुई तिमाही तक सरकारी बैंकों का कुल एनपीए 7,33,974 करोड़ रुपए था, जबकि निजी बैंक इस मामले में सरकारी बैंकों से बेहतर हैं। हालांकि इनका कुल एनपीए 1,02,808 करोड़ रुपए पहुंच गया है। सरकार ने बैंकों का एनपीए बढ़ने के लिए कॉरपोरेट हाउस और अन्य कंपनियों को जिम्मेदार ठहराया है। बैंकों के कुल एनपीए में कॉरपोरेट कंपनियों की भागीदारी 77 फीसदी है। प्रमुख सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक का एनपीए सबसे ज्यादा है। एसबीआई का बैड लोन बढ़कर 1.86 लाख करोड़ रुपए हो गया है। पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) का एनपीए 57,630 करोड़ रुपए, बैंक ऑफ इंडिया का (49,307 करोड़), बैंक ऑफ बड़ोदा का (46,307 करोड़ रुपए), कैनरा बैंक ( 39,164 करोड़) और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया का एनपीए 38,286 करोड़ रुपए हो गया है। निजी बैंक भी एनपीए से अछूते नहीं हैं। सबसे ज्यादा एनपीए आईसीआईसीआई बैंक का है। आईसीआईसीआई बैंक पर 44,237 करोड़ रुपए का बैड लोन है, जबकि एक्‍स‍िस बैंक ( 22,136 करोड़ रुपए), एचडीएफसी बैंक (7,644 करोड़ रुपए) और जम्मू और कश्मीर बैंक का एनपीए बढ़कर 5,983 करोड़ रुपए हो गया है। बैड लोन की रिकवरी करने के लिए डेट रिकवरी ट्र‍िब्यूनलों का दायरा बढ़ाया गया है। वित्तीय वर्ष 2016-17 के दौरान कुल 33 ट्रिब्यूनल कोर्ट थे, जबकि इसे बढ़ाकर 39 कर दिया गया है। यह ट्रिब्यूनल कोर्ट एनपीए के पेंडिंग केसों को निपटाएंगे। एक सूत्र के अनुसार पिछले कुछ साल से हाउसिंग लोन व एजुकेशन लोन भी वापस नहीं आ रहे हैं। भारतीय बैंकर्स असोसिएशन (आईबीए) के आंकड़े के अनुसार एजुकेशन लोन सेगमेंट के तहत गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) वित्त वर्ष 2014-15 में जहां 5.7 प्रतिशत था, वहीं वित्तीय वर्ष 2015-16 में यह बढ़कर 7.3 प्रतिशत हो गया है। पिछले वित्त वर्ष में भी इसमें बढ़ोतरी हुई और यह 7.67 प्रतिशत के आंकड़े पर पहुंच गया है।

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