रिपोर्ट:राजेश सिन्हा/
कुव्यवस्थाओं को लेकर अक्सर सुर्खियां बटोरती आ रही खगड़िया की स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार कब तक संभव है, यह तो विभागीय पदाधिकारियों के साथ-साथ प्रशासनिक अधिकारी ही जानें। लेकिन खगड़िया पीएचसी के आज की व्यवस्था को देखकर यह कहने में शायद कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी कि धरती के भगवान कहे जाने वाले कुछ भगवान भी हैवानियत का नजारा सार्वजनिक करने से बाज नहीं आते। स्वस्थ्य होने की कामना लेकर पहुंचने वालों को भी भगवान भरोसे भेड़-बकरियों की तरह छोड़ दिया जाता है। जबकि आॅपरेशन के बाद मरीजों को संक्रमण से बचाने की तमाम हिदायतें परिजनों सहित अन्य को भी दी जाती रही है। दरअसल खगड़िया पीएचसी में परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत महिलाओं का आपरेशन तो किया गया, लेकिन आपरेशन के बाद मरीजों को भेड़ बकरियों की तरह खाली जमीन पर ही सुला दिया गया है। हद तो यह कि सभी मरीजों को एक फोर्थ ग्रेड स्टाफ के सहारे छोड़ दिया गया। मामले की जानकारी मिलते ही जिलाधिकारी जय सिंह के द्वारा न केवल संज्ञान लिया गया है बल्कि गंभीर कार्रवाई का संकेत भी मिलने लगा है। लेकिन सुलगता सवाल यह है कि आपरेशन के बाद अगर कोई मरीज संक्रमण की शिकार होते हैं तो जिम्मेवारी होगी आखिर किसकी?

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