पढ़ने के लिए बच्चों को करनी पड़ती है नौका की सवारी, बिहार से जाना पड़ता है यूपी, बिहार की शिक्षा व्यवस्था का सच।

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कैमूर/मुकुल जायसवाल
बिहार सरकार के द्वारा शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के बावत करोड़ों रुपये पानी की तरह भले ही बहाया जाता हो लेकिन विकास का दावा करने वाली नीतीश सरकार की बोलती तब बंद हो जाती है जब शिक्षा का मामला सामने आता है। अगर बात हम कैमूर जिले के दुर्गावती प्रखंड की करें तो दर्जनों गांव के बच्चे आज भी नाव पर बैठकर नदी पार कर यूपी के भुजना इंटर कालेज में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। बच्चों की पढ़ाई के प्रति जज्बा ऐसा है कि तमाम मुश्किलों के बावजूद नाव में बैठ कर पढ़ने जाने को मजबूर है । बारिश के दिनों में जब नदी में पानी आ जाता है तो बच्चों का पढ़ाई भी बंद हो जाती है।  यहां तक कि कभी कभार नाव भी नदी की तेज धार में डुब चुकी है। बात अलग है ग्रामीणों के सहयोग से बच्चों को सकुशल बचा लिया गया था । लेकिन फिर भी हर खतरों को झेलते हुए आज भी इस क्रांति युग में बच्चे नाव पर बैठकर नदी पार कर पढ़ने को मजबूर हैं क्योंकि इस इलाके के 10 से 15 किलोमीटर के दायरे में आठवीं के बाद कोई भी न तो हाई स्कूल और नहीं इंटरमीडिएट स्कूल। ग्रामीण बताते हैं कि हमारे गांव में एक मिडिल स्कूल है, जहां बच्चे आठवीं तक की पढ़ाई तो पूरी कर लेते हैं ।लेकिन नवमी , दशमी और इंटरमीडिएट की पढ़ाई के लिए उन्हें बिहार की नदी को पार कर यूपी की सीमा में जाकर अपनी पढ़ाई पूरी करनी होती है । क्योंकि हमारे गांव से 10 से 15 किलोमीटर दूरी पर इंटरमीडिएट विद्यालय तो है लेकिन बहुत दूर हो जाने के कारण बच्चियां जा नहीं पाती है । फिर मजबूरी में हम लोगों को तमाम खतरों को देखते हुए भी नाव के माध्यम से बच्चियों को बिहार की करमनासा नदी को पार करा कर यूपी के भुजना गांव में पढ़ाई के लिए भेजना पड़ता है ।
बच्चियां बताती हैं कि बारिश के दिनों में हम लोगों की पढ़ाई बंद हो जाती है और कभी कभार तो नदी की तेज धार में हमारी नाव भी डूब जाया करती है। फिर भी सरकारी सुविधा नहीं मिलने के बावजूद भी हम लोग अपनी पढ़ाई के लिए बिहार से उत्तर प्रदेश जाते हैं ,जहां हमें इंटरमीडिएट तक की शिक्षा मिल पाती है। राजकुमार इंटर कॉलेज भुजना यूपी के प्रिंसिपल का कहना है विद्यालय उत्तर प्रदेश में है। लेकिन कैमूर जिले से सटे गांव के बच्चे यहां पढ़ने आते हैं। हालांकि दोनों गांव का बंटवारा सिर्फ नदी के माध्यम से हुआ है। नदी के उस पार दर्जनों गांव है लेकिन शिक्षा के लिए कोई विद्यालय नहीं होने के कारण वहां के सैकड़ों बच्चे नदी पार कर यूपी स्थित विद्यालय में पढ़ने के लिए आते हैं । जिसमें 45 प्रतिशत से ज्यादा बच्चे बिहार के कैमूर जिले के कानपुर गांव के हैं। वही जिलाधिकारी ने इन सारी बातों पर संज्ञान लेते हुए मौके का जायजा लेने की बातें कही और यथासंभव आसपास एक विद्यालय खुलवाने या फिर बच्चियों को वहां जाने के लिए एक पुल का निर्माण कराने की बातें कही है। बहरहाल, यह देखना दिलचस्प होगा कि शिक्षा व्यवस्था में कब सुधार आती है।