राजेश सिन्हा की रिपोर्ट
भारतीय जनता पार्टी के क्रांतिकारी नेता सह सुप्रसिद्ध लोक गायक सुनील छैला बिहारी तथा रामपुर के सरपंच नूर आलम को गांधीगिरी तरीके से आंदोलन किए जाने के बाद भी जेल भेज दिया जाना कितनी बड़ी अपराध है, यह किसी से छिपी नहीं है। बावजूद इसके अगर दोनों को बिना शर्त रिहा नहीं किया गया तो भारतीय जनता पार्टी उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी। उक्त बातें भाजपा के खगड़िया जिलाध्यक्ष अर्जुन शर्मा ने एक बयान जारी कर कही। श्री शर्मा ने कहा है कि गांधीगिरी तरीके से आंदोलन करने वाले दोनों साथियों को गलत दफा लगाकर भेज दिया जाना सरासर अन्याय है।बिजली से संदर्भित समस्याओं के निष्पादन के लिए गांधीवादी विचार अपनाते हुए लोक गायक छैला बिहारी तथा रामपुर सरपंच नूर आलम गोगरी अंचल कार्यालय परिसर में धरना पर बैठे थे । लेकिन गलत दफा लगाकर दोनों को जेल भेज दिया गया। जिलाध्यक्ष अर्जुन शर्मा तथा मीडिया प्रभारी मनीष कुमार राय ने सवालिया लहजे में कहा है कि क्या सुशासन की सरकार में नेता या समाजसेवियों को समाज की समस्याओं के लिए धरना-प्रदर्शन या आमरण अनशन करना गुनाह हो गया है। क्या ऐसा नहीं लगता है कि विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश में जुटी है नीतीश सरकार। कई अन्य सवालों को उठाते हुए नेताद्वय ने कहा है कि सात निश्चय योजना के तहत में घर-घर बिजली पहुंचाए जाने का ऐलान किए जाने के बाद भी अंधकार में रहते-रहते जब गोगरीअनुमंडल के लोग परेशान हो गये तब रामपुर के सरपंच नूर आलम ने आंदोलन का बिगूंल फूंका और छैला बिहारी आंदोलन में शरीक होने पहुंचे थे।लेकिन सुनियोजित योजना के तहत दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। राज्य सरकार के साथ-साथ गोगरी अनुमंडल प्रशासन द्वारा अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए समाजसेवियों को जेल भेजा गया है। यहां तुगलकी शासन होने का एहसास तो लोगों को हो ही रहा है, अग्रेजों के शासन की याद भी ताजा करायी जा रही है। भारतीय जनता पार्टी के द्वारा धरना-प्रदर्शन,पुतला दहन सहित अन्य तरीके से गिरफ्तारी का विरोध किया गया है। बावजूद इसके दोनों समाजसेवियों की रिहाई संभव नहीं हो पा रही है। भारतीय जनता पार्टी अब चुप बैठने वाली नहीं है। चरणबद्ध आंदोलन की रुपरेखा तैयार हो चुकी है, जल्द ही उग्र आंदोलन का शंख्नाद कर दिया जायेगा।

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