बाढ़ / सुनील कुमार अंशु

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आपसी मिल्लत और भाईचारा का मिसाल देखना है तो आप पटना जिला के सीधे बाढ़ चले आए जहां वाजिदपुर मोहल्ले की सबसे घनी आबादी मुस्लिमों की है। यहां के मुस्लिम समाज के भाइयों ने रामनवमी के मौके पर जो कर दिखाया वह काबिले तारीफ है। अक्सर आपने देखा होगा ईद मुहर्रम और रामनवमी के मौके पर आपसी सौहार्द बिगड़ता हुआ लेकिन बाढ़ वह धरती है जहां के हिंदू और मुस्लिम भाई एक साथ हर पर्व मनाते हैं। एक दूसरे को गले लगा कर एक दूसरे का साथ देकर एक दूसरे के पर्व में दूसरे को बधाई दे कर यहां के लोग हर पर्व मनाते हैं। यहां हिंदू और मुस्लिम में किसी प्रकार का भेदभाव या फिर किसी प्रकार का मनमुटाव भी नहीं रहता है। बाढ़ के मुसलमान वहां के हिंदू और मुस्लिम दोनों भाइयों को एक अलग संवाद देना चाहते हैं और वह यह है कि ***पहले वो इंसान है फिर हिंदू या मुसलमान। रामनवमी के मौके पर दोनों समुदायों के लोगो ने मिशाल पेश की। जुलुश के दौरान हिन्दू और मुसलमान भाइयो ने एक दूसरे को गले लगाया। मुसलमान भाइयो ने जगह जगह स्टाल लगाकर हिन्दू भाइयो को सरबत पिलाई। एक साथ मिलजुलकर इस पर्व को मनाने की अनोखी मिशाल बाढ़ में ही पेश आयी। बहरहाल इतना तो साफ हैकि जो संदेश बाढ़ के हिन्दू और मुसलमानों ने देने की कोशिश की उसने सारे भेद भाव को मिटा दिया और प्रेम क्या है ये सबको बता दिया।

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