बच्चों का निवाला गटक जाते हैं गुरुजी और कार्रवाई के नाम पर मिलता है केवल आश्वासन।

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खगड़िया/राजेश सिन्हा

बच्चों में शिक्षा के प्रति जज्बा पैदा करने के उद्धेश्य से शुरु की गई एमडीएम योजना कम से कम कोसी इलाके में तो टांय टांय फिस्स साबित हो रही है और लोगों के मुंह से यह बरवस ही निकल जाता है कि बच्चों का निवाला गटक जाते हैं गुरुजी। लेकिन उससे भी बड़ी हकीकत सामने रखकर एमडीएम डीपीओ चन्द्रशेखर प्रसाद शर्मा ने विभागीय आलाधिकारियों के समक्ष गंभीर सवाल पैदा कर दिया है। बावजूद इसके कार्रवाई नहीं होना कोढ़ मे खुजली का काम कर रही है। एमडीएम डीपीओ ने पत्रांक १८२ के माध्यम से अलौली बीआरपी का पोल खोलते हुए कहा है कि अलौली प्रखंड के कई विधालय के कई शिक्षिकाओं को विधालय से गायब रहने की छूट मिली हुई है। प्राथमिक विधालय फुलवरिया,कन्या मध्य विधालय सहसी, प्राथमिक विधालय बेतौना सहित कई अन्य विधालय का मासिक मूल्यांकन तक नहीं होता। अनुपस्थित रहकर भी शिक्षक_शिक्षिकाएं वेतन उठाने में आगे रहते हैं। लेकिन अलौली के बीआरपी विजय कुमार का कहना है कि लगभग नौ सौ शिक्षकों का बोझ उन्हें उठाना पड़ता है। ऐसी स्थिति में सभी शिक्षक पर नजर रखना संभव नहीं है। कौन विधालय आता है और कौन नहीं, ख्याल रखना मुश्किल है। दूसरी तरफ जिला शिक्षा पदाधिकारी सुरेश साहु का कहना है कि मामला गंभीर है। एमडीएम डीपीओ की अनुशंसा पर कार्रवाई की प्रक्रिया अपनायी जा रही है। बहरहाल, कार्रवाई होगी अथवा नहीं, यह सवाल अब भी बना हुआ है।