सुनील कुमार अंशु / बाढ़

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बाढ़ – 22 वर्षो तक वतन की हिफाजत करनेवाले देश के सच्चे सिपाही और आर्मी का हवलदार अरविन्द सिंह कहाँ है इसका जबाब किसी के पास नहीं है। नौकरी पर जाते समय 13 साल पहले गायब अरबिन्द का अब तक पता क्यों नहीं लगाया जा सका। आर्मी में हवलदार रहे अरविन्द सिंह को जमीन खा गयी या आसमान निगल गया। जी हां कुछ इन्हीं सवालों के लेकर वर्षो से सिसकियाँ भर रहा आर्मी जवान का परिवार शासन और प्रशासन से इंसाफ की गुहार के लिए दर दर भटकने को मजबूर है। यह कहानी एक एैसे परिवार कि है जिसके मुखिया ने 22 साल तक देश के लिए सीमा पर दुश्मनों के साथ लोहा लेते हुए अपने वतन कि हिफाजत के लिए रात कि निंद और दिन का चैन लुटाया। 2004 में आर्मी हवलदार अरबिन्दं सिहं का एक जवान बेटे कि मौत होने से वो इस कदर आ
हत हुए कि छुट्टी पर आने के बाद चार माह तक घर में ही रह गये। चार माह बाद अरविन्द अपनी नौकरी पर नासिक पहुच कर अपने डियूटी पर तैनात भी हुए,लेकिन हवलदार अरबिन्द सिहं को जमीन निगंल गया या फिर आसमान निगल गया यह किसी को पता नहीं। अब अरबिन्द के गुम हुए तेरह साल गुजर गये पर उनकी पत्नी सिया देवी के मांग में सिन्दूर और हाथ में चुडीयां अरबिन्द का इंतजार आज भी इंतज़ार कर रही हैं। बैसे तो अरविन्द को पाच बेटीयां और एक बेटा है जिसमे तीन कि शादियां हो चुकी है और दो बेटीयां अब भी कुँआरी है। वही बेटा राहुल आज भी बेरोजगार का द्वंस झेल रहा है। परिवार ने आर्मी कार्यलय का सैकडों बार चक्कर लगाया पर आज तक न कोई सुराग मिला और न ही अरबिन्द के परिवार को फुटी कौडी मिली। हाल यह है कि अरबिन्द सिंह के एक बिगहा जमीन भी भाग दौर और गुजर बसर करने में बीक गया। आज पूरा परिवार भूखमरी की कगार पर है। अरबिन्द कि पत्नी को पेट का कैन्सर है जिसका न ईलाज हो पा रहा है और ना ही बेटीयों की शादी हो पा रही है। बेटा राहुल भी नौकरी की तलाश में दर दर भटक रहा है।

अब सवाल है कि 22 साल तक देश कि सेवा
करने का जज्बा रखनेवाला जवान महज 02 साल कि नौकरी और परिवार को छोड कर कहा जा सकता है। विभाग ने अरबिन्द के रहस्यमई ढंग से लापता होने के बाद भगौड़ा करार देकर अपना पल्ला झाड़ लिया है। वही पत्नी ने गुमसुदगी का मामला बाढ थना में 2005 में ही दर्ज करायी थी पर निदान कुछ भी नही हुआ। वही विभाग हर बार सिर्फ कागज पर कागज जुटाने की बात करता है पर इस लाचार और बेबस परिवार की भुखमरी पर किसी की नजर नहीं जाती। परिवार हर जगह फरियाद लगा कर थक चुका है। अरविन्द सिंह का बेबस परिवार अब लचर होकर पुरे परिवार सहित आत्महत्या करने कि बात कर रहा है लेकिन सिस्टम हैकि सुनने का नाम नहीं ले रहा।

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